मुख्यमंत्री सोलर पम्प योजना

(मुख्य बिंदु)

मध्यप्रदेश में कृषि योग्य भूमि का क्षेत्रफल लगभग 154.55 लाख हेक्टेयर है, जिसमें से विभिन्न स्त्रोतों से लगभग 89.70 लाख हेक्टेयर में सिंचाई होती है। कुल सिंचाई स्त्रोतों के लगभग 27 प्रतिशत क्षेत्रों में लघु, मध्यम एवं वृहद् सिंचाई परियोजना के माध्यम से सिंचाई होती है, जबकि शेष लगभग 73 प्रतिशत क्षेत्रों में विद्युत पम्प एवं डीजल पम्प के द्वारा सिंचाई की जाती है। भारत शासन, राज्य शासन व विद्युत वितरण कम्पनियों द्वारा ऊर्जा क्षेत्र में अत्याधिक निवेश के उपरांत भी, प्रदेश में कई क्षेत्र ऐसे है, जहाँ डीजल पम्पों के माध्यम से सिंचाई की जाती है। दूर-दराज के क्षेत्रों में डीजल उपलब्धता में परेशानी आती है तथा डीजल पम्प के द्वारा सिंचाई में किसान का काफी व्यय होता है। असिंचित क्षेत्रों में व डीजल पम्पों के स्थान पर सोलर पम्पों के उपयोग से प्रदेश में सिंचित भूमि का क्षेत्रफल बढ़ेगा, कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी, किसान व्यवसायिक व अन्य फायदे की फसल उगा सकेंगें और किसानों के लिये कृषि लाभ का व्यवसाय हो सकेगा, जो राज्य शासन का प्रमुख ध्येय है। उक्त परिपेक्ष्य में, माननीय मुख्यमंत्री जी ने ‘ग्राम भ्रमण कार्यक्रम’ के उपरांत दिनाँक 03/11/2015 को सोलर पम्प को प्रोत्साहित करने की घोषणा की थी। इसके दृष्टिगत, सिंचाई प्रयोजन के लिये सोलर पम्प स्थापना की योजना ‘मुख्यमंत्री सोलर पम्प योजना’ तैयार की गई है।

उद्देश्य :-

उत्पादकता बढ़ाने के लिए राज्य में सिंचिंत क्षेत्र बढ़ाना,

जिन क्षेत्रों में बिजली की उपलब्धता नहीं है, वहाँ सिंचाई की व्यवस्था कराना,

डीजल से सिंचाई करने में किसानों पर आने वाले वित्तीय भार से उन्हें बचाना,

सिंचाई हेतु विद्युत वितरण कम्पनियों द्वारा दिए जाने वाले अस्थाई विद्युत कनेक्शनों में कमी लाना,

किसानों को सक्षम बनाने के लिए, उच्च मूल्य बागवानी की फसलों को बढ़ावा देना,

कुशल सिंचाई विधियों के माध्यम से भूजल का संरक्षण, और

डीजल पम्प से होने वाले प्रदूषण को कम करना।

उपरोक्त के अतिरिक्त, सिंचाई के लिए उपयोग न होने पर और उसके साथ भी, सौर पेनलों का उपयोग विभिन्न वैकल्पिक उपयोगों, जैसे लाईंटिंग, बैटरी चार्जिंग, सूक्ष्म ग्रिड, आदि के लिए किया जा सकता है।

मध्यप्रदेश शासन, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार और राष्ट्रीय कृषि विकास योजना द्वारा देय अनुदान के माध्यम से सिंचाई प्रयोजन के लिए सोलर पम्प स्थापना की योजना में 3 एच.पी. तक सोलर पम्प के लिए लागत का 10 प्रतिशत और उससे अधिक क्षमता के सोलर पम्प के लिए लागत का 15 प्रतिशत होगा, तथापि 5 एच.पी. से अधिक क्षमता के सोलर पम्पों पर 5 एच.पी. का राज्य अनुदान व निर्धारित केन्द्रांश ही लागू होगा।

संपूर्ण योजना –